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निदेशालय के बारे में

भारत सरकार की जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहरों के लिए, जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा हो, उन शहरों में तीव्र बस परिवहन व्यवस्था या संगठित नगरीय परिवहन कार्यविधि को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। भारत सरकार, नगरीय परिवहन मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों के लिए “जेएनएनयूआरएम के तहत नगरीय परिवहन प्रणाली हेतु बसों की खरीद के लिए अनुदान” के लिए विभागादेश संख्या: K-140 11/48/2006-Ut(Pt) दिनांक: 12/01/2009 के निर्देश जारी किया है।

सतत परिवहन व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए, भारत सरकार ने राज्य और शहरी स्तर पर निम्न सुधार प्रस्तावित किए हैं:-

राज्य स्तर

  • शहरी-स्तर पर एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण को स्थापित करना, उन सभी शहरो में जिनकी आबादी 10 लाख से ऊपर हो (विधिवत एक कानून द्वारा समर्थित), ताकि नगरीय परिवहन और उसके एकीकृत प्रबंधन से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने के लिए समन्वित योजना की सुविधा प्रदान की जा सके।
  • राज्य स्तर पर समर्पित नगरीय परिवहन अनुदान को स्थापित करना।
  • डेन्सीफिकेशन के साथ एमआरटीएस कॉरिडोर और स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में भूमी-उपयोग और परिवहन के एकीकरण के लिए शहरों के उपनियमों और मास्टर प्लान में बदलाव।
  • वर्तमान में विभिन्न विभागों के खिलाफ नगरीय परिवहन के मामलों को निपटाने के लिए राज्य स्तर पर एक विभाग को नामित किया जाएगा।
  • सभी सार्वजनिक और मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए समयानुसार संशोधित किराए को नियामिक/संस्थात्मक क्रियाविधि को स्थापित करना।
  • राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा नगरीय बसों एवं शहरी बस सेवा/बीआरटीएस पर अपने सभी करों पर छूठ देना/प्रतिपूर्ति करना।

शहरी स्तर:

  • शहरी स्तर पर समर्पित नगरीय परिवहन अनुदान को स्थापित करना।
  • प्रासंगिक कानूनों के अधीन सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक परिवहन, मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक उपयोगिता के लिए विज्ञापन नीति को लागू करना, जिससे विज्ञापन राजस्व उत्पन्न होगा।
  • पार्किंग नीति को लागू करना, जिसमें पार्किंग शुल्क भूमी उपयोग का सही इस्तेमाल प्रदर्शित करेगा, जिसका उपयोग सार्वजनिक परविहन को और आकर्षित बनाने के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आर्टीरियल / रिंग रोड पर पार्किंग को प्रतिबंधित किया जाएगा और मल्टी-लेवल पार्किंग केंद्रों पर पार्क-एण्ड-राईड सुविधा आदि प्रदान की जाएंगी।
  • संगठित अनुबंधों के तहत पीपीपी पर, बस सेवाओं के लिए सिटी-स्पेसिफिक एसपीवी द्वारा आईटीएस का इस्तेमाल कर एक सुव्यवस्थित और उपयोगी शहरी बस प्रणाली को लागू करना, जहां सरकार की संबंधित संस्थाएं नियोजन, समन्वय, अनुबंध, अनुश्रवण, पर्यवेक्षण के साथ आम इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवाओं आदि के प्रबंधन पर भी कार्य कर रही हों।
  • मल्टीमॉडल एकीकरण, जिसमें उपनगरीय रेलवे शामिल हो(एमओआर को सम्मिलत कर के) ताकि क्षेत्र में नेटवर्क-कनेक्टिविटी और निर्बाध सफर के लिए एकल टिकटिंग जैसी सुविधाएं प्रदान की जा सकें।
  • ट्रैफिक सूचना प्रबंधन नियंत्रण केंद्र को स्थापित करना, ताकि यातायात की प्रभावशाली निगरानी और प्रवर्तन किया जा सके और साथ ही भविष्य नीति के लिए डाटा-जनरेशन और डाटा कलेक्शन को स्थापित किया जा सके।

ऊपर निर्देशित योजना के तहत, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने सात शहरों, लखनऊ, कानपुर, आगरा, मथुरा, इलाहाबाद, वाराणसी और मेरठ के लिए डीपीआर प्राप्त किया है। शुरुआत में डीपीआर में ऊपरी शहरों के लिए 1310 बसों का प्रस्ताव रखा गया था। परामर्शदाता, मेसर्स यूएमटीसी ने शहर की निर्धारित आवश्यक्ताओं के अनुसार सलाह दी, जिसमें विभिन्न शहरों में जनता के लिए यातायात को और सुचारु बनाने के लिए चार तरह की बसों का प्रस्ताव रखा गया। भारत सरकार और नगरीय विकास मंत्रालय द्वारा डीपीआर को स्वीकार कर लिया गया, जिसमें राज्य सरकारों को अतिरिक्त केंद्र सहायतित दर पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत (रुपए 326.89 करोड़) आवंटित किया गया है और बाकी राशी का 20 प्रतिशत राज्य के नगरीय विकास विभाग द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा और शेष 30 प्रतिशत राशी विकास प्राधिकरण, नगर पालिका परिषद, आवासीय बोर्ड एवं परिवहन विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। इस योजना का निष्पादन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा किया जाएगा।

उपयोगी, संगठित, आर्थिक और सतत नगरीय परिवहन व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए नामित विभाग, नगरीय विकास विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्देश जारी किए हैं, जिससे विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के तहत बसों का संचालन सुनिश्चित किया जा सके, ताकि इस व्यवस्था को और बढ़ावा दिया जा सके और स्वतंत्र रूप से इनका संचालन किया जा सके, जैसा कि भारत सरकार द्वारा अपेक्षित है। भारत सरकार के सुझाव के अनुसार और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में संस्तुतिओं के आधार पर, एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) का गठन किया जाना था और एसपीवी के सुचारु संचालन के लिए, नगरीय परिवहन निदेशालय की संकल्पना की गई, जो सर्वोच निकाय यूएमटीए के सचिवालय के रूप में भी कार्यरत होगा और नगरीय परिवहन के मामलों पर भी निगरानी रखे और साथ में विभिन्न एसपीवी के वायबिलिटी गैप फंडिंग का आकलन, अनुश्रवण, नियंत्रण और वितरण, कर सके, जैसा की योजना में निर्देशित किया गया है।

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